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कुछ पन्ने – ग़ज़ल
कुछ पन्ने कभी ऐसे भी लिखे हैं मैने जो फटते भी नहीं हैं, मिटते भी नहीं पिंजरे में बंद मेरे कुछ टुकड़े पड़े हैं जो दिखते तो हैं,...
May 2, 20251 min read
बेतलब
दिल में लिए प्यार, निकला गुलज़ार मगर खो आया कल था मासूम, हर इकरार अब तो रो आया मायूस मन, शक-ए-नज़र दूर किया, जो भी आया ...
May 2, 20251 min read
Intoxicated
This evening Like every other Laughing screaming Over each other Singing drinking Higher further The noise deafens A silent sob, a...
May 2, 20251 min read
खो गए तुम
भीड़ ही भीड़ में खो गए तुम कहो, कितने बड़े हो गये तुम शोर के ज़र्रे चल रहे थे उधर एक आहट से रहकर हो गए तुम सब की शक्लों की हंसी देखी तो...
May 2, 20251 min read
Double Agent
Hundreds of people Talking, jiving is staple Moving through the masses I shake hands with Everyone who passes I remember who does what...
May 2, 20251 min read
झड़ती दीवारें
जो दीवारें झरझरित हो टूटतीं हों, टूटने दो अश्रु यदि निरंतर फूटते हों, फूटने दो कदाचित ही कोई मौसम ऐसा आता है जो इतना कुछ करने की ताक़त रख...
May 2, 20251 min read
ठहराव
फ़ितूर-ए-ज़ोर हर रोज़ हर रोज़ भाग भाग ये कैसी लगी सोज़ रुक जा, थम जा जो भी है वो ख़ुद आएगा ना भी आए कम से कम तू तो संभल जाएगा
May 2, 20251 min read
Specks
In this endless universe, of which time is just another dimension, we are but a speck, stuck on a date and time we invented This is the...
May 2, 20251 min read
जागृति
ये नीला सा ओस का भीगा समन्वय ये धीमे धमकता सा धरती का ह्रदय रात की चुप्पी को कोयल थी चीरे धूप सुनहरी आखों पे धीरे धीरे ये काली सी,...
May 2, 20251 min read
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